Historical Era of Jharkhand

Chota Nagpur Plateau in Hindi
Chota Nagpur Plateau in Hindi

Historical era of Jharkhandझारखंड का इतिहास बहुत पुराना और गौरव से भरा रहा है। मैं इस लेख के माध्यम से झारखंड के इतिहास के बारे में जानकारी दे रहा हूँ।आशा है कि यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण साबित होगी और आपकी प्रतियोगी परीक्षाओं, झारखंड और जी.के. के बारे में सभी प्रकार की जानकारी के लिए मददगार साबित होगी। इसके लिए आप इस वेबसाइट पर विजिट करें।

झारखंड का इतिहास – ऐतिहासिक युग

  • छोटानागपुर क्षेत्र पर बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव पड़ा था। झारखण्ड के कई क्षेत्रों में बौद्ध धर्म के अवशेष आज भी पाये जाते हैं, जिनमें धनबाद के दलसी व बुद्धपुर के बौद्ध स्मारक प्रमुख हैं।
  • खूंटी से तीन किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम बेलवादाग ग्राम है, जहां एक टीला बौद्ध विहार के अवशेष की तरह दिखता है।
  • झारखण्ड के अनेक स्थलों से बुद्ध की मूर्तियां मिली हैं। रांची के जोन्हा जल-प्रपात, गुमला जिला के कुटगा ग्राम, जमशेदपुर के भूला नामक स्थान तथा धनबाद के ईचागढ़ आदि स्थानों से बुद्ध की प्रतिमाएं मिली हैं।
  • झारखण्ड में बौद्ध धर्म के साथ-साथ जैन धर्म का भी व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ। जैनियों के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का निर्वाण पार्श्वनाथ (पारसनाथ) पहाड़ी पर आठवीं शताब्दी ई.पू. में हुआ था।
  • छोटानागपुर में मानभूम जैन सभ्यता एवं संस्कृति का केन्द्र था।
  • झारखण्ड क्षेत्र से मौर्यवंशी शासक भी परिचित थे, क्योंकि अशोक के शिलालेख में ‘आटवी’ अथवा अटवा नाम का उल्लेख मिलता है। आटवी प्रदेश बघेलखण्ड से उड़ीसा के समुद्र तट तक फैला हुआ था, जो निश्चित रूप से छोटानागपुर इस क्षेत्र के अंदर पड़ता था।
  • छोटानागपुर का उल्लेख अशोक के अभिलेख संख्या-13 में अटावी / अटाव नाम से मिलता है, जिसमें कहा गया है कि कलिंग के समीपवर्ती अविजित जनजातियों को धम्म का आचरण करना चाहिए।
  • झारखण्ड क्षेत्र में समुद्रगुप्त के प्रवेश के बाद बौद्ध धर्म का पराभव शुरू हुआ।
  • कालांतर में कट्टर शैव शासक शशांक ने छोटानागपुर के सभी बौद्ध स्थलों को नष्ट कर दिया।
  • बंगाल के पाल शासकों के समय वज्रयान बौद्ध सम्प्रदाय छोटानागपुर क्षेत्र में फलता-फुलता रहा।
  • इसी काल में हजारीबाग जिले के रामगढ़ अनुमण्डल के अंतर्गत ‘छिन्नमस्तिका शक्तिपीठ’ की स्थापना हुई, जिससे यहां हिन्दू धर्म का प्रभाव कायम हो गया, फलतः इस क्षेत्
  • इस क्षेत्र के अनेक स्थानों में हिन्दू देवी-देवताओं के मंदिर बनाये गये।
  • कनिष्क के सिक्के रांची से मिलें हैं।
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