British Entry into Jharkhand | झारखंड में अंग्रेजों का प्रवेश

British Entry into Jharkhand |  झारखंड का इतिहास बहुत पुराना और गौरव से भरा रहा है। मैं इस लेख के माध्यम से झारखंड के इतिहास के बारे में जानकारी दे रहा हूँ।आशा है कि यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण साबित होगी और आपकी प्रतियोगी परीक्षाओं, झारखंड और जी.के. के बारे में सभी प्रकार की जानकारी के लिए मददगार साबित होगी। इसके लिए आप इस वेबसाइट पर विजिट करें।

British Entry into Jharkhand

  • सिंहभूम झारखण्ड में अंग्रेजों का प्रवेश सबसे पहले सिंहभूम की ओर से हुआ।
  • इस क्षेत्र में घाल राजाओं का घालभूम सिंह राजाओं का पोराहाट और हो लोगों का कोल्हान राज्य का विशेष महत्व था
  • इन राज्यों से नियमित कर वसूलने तथा इन्हें अपनी अधीनता में रखने के लिए जनवरी 1767 फरगुसन को सिंहभूम पर आक्रमण करने के लिए भेजा गया।
  • 22 मार्च, 1767 को घाटशिला के महल पर अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया।
  • 1768 ई. में जगन्नाथ घाल ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया, जिसे घाल विद्रोह के नाम से जाना जाता है।
  • 1820 ई. में मेजर रफसेज ने कोल्हान क्षेत्र में प्रवेश किया। रोरो नदी के तट पर हो एवं अंग्रेजी सेना में लड़ाई हुई, जिसमें अंग्रेज विजयी हुए।
झारखण्ड में अंग्रजो का प्रवेश | british entry into jharkhand
  • 1821 ई. में कर्नल रिचर्ड के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना का प्रवेश ‘हो’ क्षेत्र में हुआ। एक माह त बले संघर्ष के पश्चात् हो लोगों ने कम्पनी की अधीनता स्वीकार कर ली।
  • 1831-32 के कोल विद्रोह में हो लोगों ने खुल कर भाग लिया। इन्होंने गंगानारायण सिंह चुआड़ विद्रोहियों की हर संभव सहायता की बाध्य होकर अंग्रेजों को इनके विरुद्ध पुनः अभियान छेड़ना पड़ा।
  • 1836 ई. में टी.एस. विलकिंसन की सलाह पर एक अंग्रेजी सेना कोल्हान में प्रविष्ट हुई। चार माह के संघर्ष के बाद फरवरी 1837 ई. में हो लोगों ने आत्मसमर्पण कर दिया। सीधे कंपनी को कर देने के लिए तैयार हुए।
  • 1837 ई. में कोल्हान क्षेत्र को एक नयी प्रशासकीय इकाई बनाकर एक अंग्रेज अधिकारी अधीन कर दिया गया। इस तरह ईस्ट इंडिया कम्पनी को दीवानी प्राप्त होने के 72 वर्ष के पश्चा ही कोल्हान क्षेत्र पर अंग्रेजों का आधिपत्य स्थापित हो सका।
  • पलामू 1771 ई. में कैमक ने पलामू जिले पर अधिकार कर लिया। उस समय चित्रजीत राय थे।पलामू का चरी राजा घेरो राजा चित्रजीत राय और ठकुराई जयनाथ सिंह रामगढ़ भाग गये।
  • अप्रैल 1772 में जयनाथ सिंह और टॉमस स्कॉट के बीच युद्ध हुआ। 26 अप्रैल को अंग्रेजी सेना हार गयी। इस युद्ध में सर्जेंट पेलविन मारा गया, जबकि स्कॉट पैर में गोली लगने के कारण घायल हो गया।
  • रंका के किले पर जयनाथ सिंह ने अधिकार कर लिया। कैमक जब पुनः एक बड़ी सेना लेक कुंडा पहुंचा तो जयनाथ सिंह सितम्बर 1772 में पलामू छोड़ कर किसी अज्ञात स्थान पर चले गये में इस प्रकार, पलामू पर अंग्रेजी आधिपत्य स्थापित हो गया।
  • छोटानागपुर खास : अंग्रेजों के छोटानागपुर खास प्रवेश के समय यहां का राजा नागवंशी दृपनाथ शाही था
  • दृपनाथ शाही ने सतबरवा में कैमक से मुलाकात कर अंग्रेजों की अधीनता तथा 12,000 रुप सालाना कर देना स्वीकार किया।
  • हजारीबाग : हजारीबाग क्षेत्र में अंग्रेजों को सबसे अधिक प्रतिरोध का सामना रामगढ़ राज्य की ओ से करना पड़ा।
  • रामगढ़ का राजा मुकुन्द सिंह शुरू से अंत तक अंग्रेजों का विरोध करता रहा।
  • हजारीबाग में अंग्रेजों का प्रवेश कैप्टन कैमक के नेतृत्व में हुआ।
  • 1772 ई. में रामगढ़ राज्य पर चढ़ाई की गयी। मुकुन्द सिंह भाग कर पंचेत चला गया। तेज सिंह को रामगढ़ का राजा घोषित किया गया।
  • 1773 ई. में रामगढ़, पलामू और छोटानागपुर खास को मिलाकर रामगढ़ जिले का गठन किया गया
  • संथाल परगना संथाल परगना प्राचीन अंग राज्य का भाग था ।
  • इस क्षेत्र को पहले जंगल तराई के नाम से जाना जाता था।
  • 1592 ई. में राजमहल को बंगाल की राजधानी बनाया गया था। 1660 ई. तक वह बंगाल की राज पानी के रूप में विख्यात रहा।
  • यहां अंग्रेजों का आगमन बक्सर युद्ध के पूर्व ही हुआ था। 1676 ई. में अंग्रेजों द्वारा यहां एक व्यापारिक एजेंसी स्थापित की गयी।
  • राजमहल क्षेत्र पर मराठों का कब्जा 1742 ई. में हुआ।
  • 1757 ई. में प्लासी के युद्ध में पराजित होने के पश्चात सिराजुद्दौला राजमहल पहुंचा था।
  • 1763 ई. में मीर कासिम के विरुद्ध मेजर एडम्स की विजय के फलस्वरूप राजमहल क्षेत्र कम्पनी का एकाधिकार स्थापित हुआ।

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