Climate Types and Regions | Geography of Jharkhand in Hindi

Chota Nagpur Plateau in Hindi
Chota Nagpur Plateau in Hindi

Climate types and regions: तापमान के आधार पर पृथ्वी की जलवायु को तीन मुख्य वर्गों में रखा जा सकता है-उष्णकटिबंधीय, शीतोष्ण कटिबंधीय तथा ध्रुवीय । वर्षा के आधार पर शुष्क, आर्द्र, ऋतुवत् शुष्क तथा ऋतुवत् आर्द्र जलवायुविक प्रकारों की पहचान की जा सकती है

Climate types and regions

(i) महाद्वीपीय प्रकार (उत्तरी एवं उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र) :

  • इस जलवायु क्षेत्र का विस्तार पलामू, गढ़वा, पश्चिमी लातेहार, उत्तरी हजारीबाग, उत्तरी चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, देवघर, पश्चिमी दुमका तथा गोड्डा जिलों में पाया जाता है।
  • गर्मी में अत्यधिक गर्मी एवं जाड़े में अत्यधिक जाड़ा पड़ना इस क्षेत्र की मुख्य विशेषता है।
  • यह क्षेत्र झारखण्ड का सबसे कम वर्षा वाला क्षेत्र है।

(ii) उप-महाद्वीपीय प्रकार (मध्यवर्ती क्षेत्र) :

  • इस जलवायु क्षेत्र का विस्तार पूर्वी लातेहार, दक्षिणी हजारीबाग, दक्षिणी चतरा, धनबाद, बोकारो, जामताड़ा एवं पश्चिमी दुमका जिला के क्षेत्रों में पाया जाता है।
  • इस क्षेत्र में वार्षिक वर्षा 127 सेंमी. से 165 सेंमी. के बीच होती है।

(iii) डेल्टा प्रकार (पूर्वी संथाल परगना जलवायु क्षेत्र) :

  • इस जलवायु क्षेत्र का विस्तार साहेबगंज तथा पाकुड़ जिला क्षेत्रों में विस्तृत है, जो राजमहल पहाड़ी के पूर्वी ढाल का क्षेत्र है।
  • यह क्षेत्र पूरी तरह ‘लू’ से मुक्त रहता है।
  • यह नॉर्वेस्टर का क्षेत्र है।
  • नार्वेस्टर से यहां 135 मिमी. वर्षा होती है।
  • यहां औसत वार्षिक वर्षा 152.5 सेमी. होती है। यहां ग्रीष्म काल में अत्यधिक वर्षा होती है।
Climate of Jharkhand edvnce.com

(IV) सागर प्रभावित प्रकार (पूर्वी सिंहभूम जलवायु क्षेत्र) :

  • इस जलवायु क्षेत्र का विस्तार पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां तथा पश्चिमी सिंहभूम जिला के पूर्वी क्षेत्रों में पाया जाता है।
  • यह क्षेत्र समुद्र से निकट है तथा खाड़ी एवं नॉर्वेस्टर के क्षेत्र में स्थित है।
  • ग्रीष्मकाल में यह क्षेत्र अक्सर तडित झंझा से आक्रांत रहता है। यहां प्रतिवर्ष औसतन 71 तड़ित झंझा आते हैं, जिनमें 10 ओलावृष्टि करते हैं।
  • यह झारखण्ड का सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र है। यहां औसतन 140 सेंमी. से 152 सेंमी. तक वर्षा होती है।

(v) आई वर्षा प्रकार (प. सिंहभूम का मध्य एवं पश्चिम भाग) :

  • इस जलवायु क्षेत्र का विस्तार दक्षिणी शंख बेसिन एवं दक्षिणी कोयल बेसिन क्षेत्र में पाया जाता है।
  • पोड़ाहाट एवं सारंडा का विशाल वन क्षेत्र इसी जलवायु क्षेत्र में विस्तृत है।
  • यहां औसतन 152 सेंमी. से भी अधिक वर्षा होती है।

(vi) तीव्र एवं सुखद प्रकार (रांची- हजारीबाग पठारी जलवायु क्षेत्र)

  • यह जलवायु क्षेत्र रांची एवं हजारीबाग के पठारी क्षेत्रों में विस्तृत है।
  • यहां की जलवायु अपने आप में अनूठे किस्म की है, जो पूरे झारखण्ड में किसी भी क्षेत्र में नहीं मिलती है।
  • यहां की जलवायु में न तो ग्रीष्म की तपिश होती है और न ही शीत की ठिठुरन ।
  • झारखण्ड का औसत वार्षिक तापमान 73°C (रांची में) तथा पाट क्षेत्र में इससे भी कम रहता है, जिसके कारण यह झारखण्ड का सबसे ठण्डा क्षेत्र है।
  • यह क्षेत्र लू तथा धूल भरी आंधी से मुक्त रहता है।

(vii) शीत वर्षा प्रकार (पाट क्षेत्र) :

  • इस क्षेत्र की जलवायु रांची पठार की तरह ही है, किन्तु यह क्षेत्र रांची पठार से अपेक्षाकृत एक ठंडा है।
  • घनघोर बादल, तीव्र वर्षा, शीतल ग्रीष्म ऋतु तथा शीत ऋतु यहां की मुख्य विशेषता है।
  • शीत ऋतु में इस क्षेत्र का तापमान हिमांक से भी नीचे चला जाता है।
  • यह क्षेत्र झारखण्ड का सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र है।

New List Of Governors of Indian States | 8 New Appointments


Total
0
Shares
Related Posts
Total
0
Share