Chota Nagpur Plateau in Hindi

Jharkhand State Construction Movement In Hindi

Jharkhand State Construction Movement : झारखंड पूर्वी भारत का एक राज्य है। राज्य की सीमा उत्तर में बिहार, उत्तर-पश्चिम में उत्तर प्रदेश, पश्चिम में छत्तीसगढ़, दक्षिण में ओडिशा और पूर्व में पश्चिम बंगाल के साथ लगती है। इसका क्षेत्रफल 79,710 वर्ग किमी है

Jharkhand State Construction Movement :

  • झारखण्ड को अलग प्रांत बनाने का आन्दोलन देश के अन्दर चलने वाले आन्दोलनों की श्रृंखल में सबसे लम्बे समय तक चलने वाला आन्दोलन रहा है। सच तो यह है कि अंग्रेजों के शासन काल में उनके खिलाफ आदिवासी क्षेत्रों में जो विद्रोह संगठित हुए, उसी में अलग राज्य के निहित थे।
  • छोटानागपुर के जनजातीय क्षेत्रों के लिए झारखण्ड शब्द का प्रयोग पहली बार मध्यकाल में हुआ। इसका प्रथम प्रयोग 13वीं शताब्दी के एक ताम्रपत्र पर हुआ है। इस काल में यह एक स्पष्ट एवं पृथक भू-खण्ड के रूप में संगठित हुआ।
  • ब्रिटिश शासन काल के दौरान झारखण्ड प्रारंभ में बंगाल एवं बाद में बिहार प्रांत का अंग बना
  • पृथक झारखण्ड की मांग ब्रिटिश काल से ही होती रही है। झारखण्ड में अंग्रेजों और उनकी शोषणकारी तथा शत्रुक्त नीतियों के विरुद्ध आंदोलन चलता रहा।
  • झारखण्ड आंदोलन का बीजारोपण ढाका में किया गया था।
  • ढाका विद्यार्थी परिषद की एक शाखा रांची में भी थी, जो आगे चलकर छोटानागपुर उन्नति समाज एवं बाद में झारखण्ड पार्टी के रूप में विकसित हुई।
  • चाईबासा निवासी जे. बार्थोलमन ढाका विद्यार्थी परिषद की रांची शाखा का संचालक थे। उ ही झारखण्ड आंदोलन का जन्मदाता माना जाता है।
  • जे. बार्थोलमन ने 1912 ई. में क्रिश्चियन स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन की स्थापना की।
  • इस संगठन का प्रारंभिक उद्देश्य गरीब ईसाई विद्यार्थियों की मदद करना था। बाद में इसे केव विद्यार्थियों तक ही सीमित न रखकर झारखण्ड के सभी आदिवासियों के सामाजिक एवं आर्थिक कल्याण का साधन बनाया गया।
  • अलग झारखण्ड के लिए आंदोलन को जीवित बनाये रखने के उद्देश्य से नये संस्थानों तथा संगठनों का उदय हुआ।
  • 1915 में झारखण्ड का पहला अंतर्जातीय आदिवासी संगठन छोटानागपुर उन्नति समाज स्थापित हुआ। आदिवासियों के सामाजिक एवं आर्थिक हितों की रक्षा करना इस समाज का लक्ष्य था। जुबेल लकड़ा, पॉल दयाल, बंदीराम उरांव, ठेबेल उरांव इस समाज के प्रमुख नेता थे।
  • पृथक राज्य के लिए एक सुनियोजित संघर्ष 1928 ई. में प्रारंभ हुआ।
  • 1928 ई. में साइमन कमीशन ने झारखण्ड क्षेत्र से प्राप्त एक ज्ञापन के आधार पर झारखण्ड के पृथक राज्य बनाने की अनुशंसा की थी, परन्तु ब्रिटिश शासकों ने उस पर कोई विचार नहीं किया।
  • झारखण्ड के संघर्षशील नेताओं ने वर्ष 1938 ई. में आदिवासी महासभा का गठन करके अपना संघर्ष योजनाबद्ध ढंग से प्रारंभ कर दिया। 1939 ई. में थियोडोर सुरीन के बाद जयपाल सिंह इसके अध्यक्ष बने।
  • 1946 ई. के संसदीय चुनाव में आदिवासी महासभा को केवल तीन सीटें प्राप्त हुई। जयपाल सिंह खूंटी से चुनाव हार गये।
  • वर्ष 1947 में देश स्वतंत्र हुआ तो झारखण्ड क्षेत्र के नेताओं की महत्वाकांक्षाएं भी मुखरित हुई, परन्तु उन्हें केन्द्र व राज्य सरकार से सहयोग नहीं मिला।
  • आदिवासी नेता जयपाल सिंह ने वर्ष 1950 ई. में ‘आदिवासी महासभा का नाम परिवर्तित करके झारखण्ड पार्टी कर दिया।
  • झारखण्ड पार्टी का गठन झारखण्ड आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी, क्योंकि इसके दरवाजे अलग झारखण्ड राज्य समर्थक गैर-आदिवासियों के लिए भी खोल दिए गये।
  • झारखण्ड पार्टी ने नवगठित क्षेत्रीय राजनीतिक दल के रूप में झारखण्ड क्षेत्र में राजनीतिक सामाजिक चेतना प्रज्ज्वलित करने के साथ-साथ जनमत संगठित करने में अपनी सम्पूर्ण शक्ति लगा दी।

झारखण्ड आंदोलन से संबंधित सभा/संगठन/समितियां

क्रमसंस्था / समिति का नामस्थापना वर्षसंस्थापक
1क्रिश्चियन स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन1912जे. बालमन
2छोटानागपुर उन्नति समाज1915जुएल लकड़ा
3किसान सभा 1930 ठेबले उरांव
4छोटानागपुर कैथोलिक सभा1933बोनिफेस लकड़ा
5छोटानागपुर-संथाल परगना आदिवासी सभा
(1939 में नाम परिवर्तन आदिवासी महासभा)
1938थियोडोर सुरीन
6झारखण्ड पार्टी1950जयपाल सिंह
7बिरसा सेवा दल1965ललित कुजूर
8अखिल भारतीय झारखण्ड पार्टी1967बागुन सुम्बई
9अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद्1968कार्तिक उरांव
10हुल झारखण्ड पार्टी1968जस्टिन रियर्ड
11झारखण्ड मुक्ति मोर्चा1973विनोद बिहारी महतो.
शिबू सोरेन व ए. के. राय
12ऑल झारखण्ड स्टूडेन्ट्स यूनियन (आजसू) 1986सूर्य सिंह बेसरा
13झारखण्ड समन्वय समिति198753 संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा
14झारखण्ड विषयक समिति1989भारत सरकार द्वारा
15झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद (जैक)।1995बिहार सरकार द्वारा
  • वर्ष 1952 में अखण्ड बिहार के प्रथम विधानसभा चुनाव में जयपाल सिंह के कुशल नेतृत्व में झारखण्ड पार्टी ने 33 विधानसभा क्षेत्रों पर विजय प्राप्त कर मुख्य विपक्षी दल का रुतबा प्राप्त किया। इसका चुनाव चिह्न गुर्गा था।
  • 1957 एवं 1962 के विधानसभा चुनावों में झारखण्ड पार्टी को क्रमश: 32 एवं 20 सीटें प्राप्त हुई।
  • झारखण्ड पार्टी ने अपने राजनीतिक वर्चस्व के आधार पर राज्य विधानसभा व लोक सभा में अपनी मांग को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
  • झारखण्ड पार्टी ने 1955 में राज्य पुनर्गठन आयोग के समक्ष जयपाल सिंह के नेतृत्व में अलग झारखण्ड राज्य की मांग को लेकर एक प्रभावशाली प्रदर्शन किया। तब आयोग ने इस क्षेत्र के दौरे पर आया, किन्तु उसने ने अलग राज्य की अनुशंसा नहीं की।
  • राज्य पुनर्गठन आयोग के समक्ष झारखण्ड पार्टी ने अलग राज्य का जो प्रारूप पेश किया था। उसमें तत्कालीन बिहार के 7, बंगाल के 3, उड़ीसा के 4 और मध्य प्रदेश के 2 जिलों को मिलाकर कुल 16 जिलों के साथ झारखण्ड की मांग की गयी थी।
  • 10 फरवरी, 1961 को पहली बार बिहार विधान परिषद में सीताराम जगतराम ने पृथक झारखण्ड के गठन हेतु भारत सरकार से आग्रह करने के लिए सदन में एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस प्रस्ताव पर काफी चर्चाएं हुई, परन्तु 24 मार्च, 1961 को सदन ने इस प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया।
  • वर्ष 1963 मे झारखण्ड पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया, जिससे पृथक झारखण्ड राज्य आंदोलन को गहरा झटका लगा यह विलय बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री विनोदानंद झा की पहल पर हुआ
  • विनोदानंद झा की सरकार में जयपाल सिंह को सामुदायिक विकास एवं ग्राम पंचायत मंत्री बनाया गया।
  • 1965 में बिरसा सेवा दल की स्थापना की गयी। इस दल ने आदिवासियों की मांग को नया स्वर दिया। 1967 में अखिल भारतीय झारखण्ड पार्टी का गठन हुआ। 1968 में हुल झारखण्ड पाटी का गठन किया गया।
  • वर्ष 1970 में जयपाल सिंह का निधन हो गया।
  • 4 फरवरी, 1973 को शिवाजी समाज के विनोद बिहारी महतो एवं सोनोत संथाल समाज के शिबू सोरेन ने मिलकर झारखण्ड मुक्ति मोर्चा का गठन किया। विनोद बिहारी महतो अध्यक्ष एवं शिबू सोरेन महासचिव बनाये गये। इसके बाद क्षेत्रीय नेता एवं कार्यकर्त्ता पुनः सक्रिय हो गये।
  • झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने अपने चार लक्ष्य तय किये अलग झारखण्ड राज्य के निर्माण के लिए। संघर्ष महाजनी प्रथा के खिलाफ संघर्ष, विस्थापितों के पुनर्वास एवं कल-कारखानों में स्थानीय लोगों की बहाली के लिए संघर्ष तथा वन कानून के विरोध में जंगल कटाई का आंदोलन।
  • 1985 ई. में कांग्रेस (ई) के विधायक देवेन्द्र नाथ चांपिया के नेतृत्व में बिहार विधान मंडल के झारखण्ड क्षेत्र के 52 विधायकों ने झारखण्ड क्षेत्र को केन्द्रीय प्रशासन के अधीन सौंपने की मांग के से संबंधित एक संयुक्त स्मार-पत्र देश के प्रधानमंत्री को दिया।
  • 22 जून 1986 को जमशेदपुर में सूर्यसिंह बेसरा के नेतृत्व में असम छात्र संगठन आसू की तर्ज पर ऑल झारखण्ड स्टूडेन्ट्स यूनियन (आजसू) का गठन हुआ।
  • सूर्यसिंह बेसरा ने आंदोलन के कार्यक्रम की घोषणा में खून के बदले खून की रणनीति का प्रतिपादन किया।
  • झारखण्ड आंदोलन में लगे विभिन्न दलों में समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से 1987 ई. में झारखण्ड समन्वय समिति (जेसीसी) का गठन हुआ।
  • जून 1987 में झारखण्ड समन्वय समिति का रामगढ़ में सम्मेलन हुआ जिसमें 25 सदस्यीय तदर्थ कमिटी का गठन किया गया। डॉ. विश्वेश्वर प्रसाद केसरी इसके संयोजक बनाये गये।”
  • इस सम्मेलन में झारखण्ड क्षेत्र में कार्यरत 53 संगठन, जिसमें बुद्धिजीवी, श्रमिक, स्त्रियां, शिक्षक छात्र हर तरह के लोग शामिल थे।
  • दिसम्बर 1987 में झारखण्ड समन्वय समिति द्वारा तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह को एक झापन दिया गया, जिसमें बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा एवं मध्य प्रदेश के 21 जिलों को मिलाकर अलग झारखण्ड राज्य बनाने की मांग की गयी।
  • 1988 में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार वनांचल प्रदेश की मांग की। उसने सिर्फ बिहार के जिलों को अलग कर अलग राज्य बनाने की मांग की।
  • 23 अगस्त, 1989 को केन्द्र सरकार द्वारा बी. एस. लाली के नेतृत्व में 24 सदस्यीय झारखण्ड विषयक समिति का गठन किया गया। इस समिति में झारखण्ड आन्दोलन से जुड़े 16 प्रतिनिधि 4 सरकारी पदाधिकारी और 4 विशेषज्ञ शामिल किये गये।
  • 31 दिसम्बर, 1991 को आजसू के एक सहयोगी राजनैतिक दल के रूप में झारखण्ड पीपुल्स पार्टी का गठन हुआ।
  • 7 अगस्त, 1995 को झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद (जैक) के गठन की राजकीय सूचना जारी की गयी। 9 अगस्त, 1995 को इस परिषद का औपचारिक गठन हुआ। शिबू सोरेन इसके अध्यक्ष और सूरज मंडल उपाध्यक्ष मनोनीत किये गये।
  • झारखण्ड क्षेत्र स्वशासी परिषद के अंतर्गत बिहार के 18 जिलों को सम्मिलित किया गया था।
  • इस परिषद को कृषि, खनन, ग्रामीण विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा अनुसूचित जनजाति समेत
    40 विभागों का भार सौंपा गया। जैक का कभी विधिवत् चुनाव नहीं हुआ।
  • 22 जुलाई, 1997 को बिहार विधानसभा द्वारा अलग झारखण्ड राज्य के गठन का संकल्प पारित
    किया गया।
  • 1998 में केन्द्र में श्री अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व में गठित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने 1997 में बिहार विधानसभा में पारित संकल्प के आधार पर वनांचल राज्य से संबंधित बिहार राज्य पुनर्गठन विधेयक तैयार किया और इसे स्वीकृति के लिए बिहार की राबड़ी देवी की सरकार के पास भेज दिया। इस विधेयक में बिहार के 18 जिलों को मिलाकर अलग ‘वनांचल राज्य बनाने की बात कही गयी थी।
  • 21 सितम्बर, 1998 को बिहार विधानसभा में उस विधेयक को 107 के मुकाबले 181 वोटों से नामंजूर कर दिया गया।
  • श्रीमती राबड़ी देवी की अल्पमत सरकार ने कांग्रेस के दबाव में 25 अप्रैल, 2000 को पृथक राज्य झारखण्ड के गठन हेतु बिहार राज्य पुनर्गठन विधेयक 2000 को स्वीकृति प्रदान की
  • 2 अगस्त, 2000 को लोक सभा तथा 11 अगस्त, 2000 को राज्य सभा द्वारा बिहार राज्य पुनर्गठन विधेयक-2000 को पारित कर दिया गया।
  • 25 अगस्त, 2000 को राष्ट्रपति ने विधेयक पर हस्ताक्षर करके अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी। इस प्रकार झारखण्ड राज्य के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ और 15 नवम्बर, 2000 को देश के 28वें राज्य के रूप में झारखण्ड का उदय हुआ।

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