Quit India Movement and Jharkhand | National Movement

Quit India Movement and Jharkhand : स्वतंत्रता से महज 5 वर्ष पहले अगस्त-1942 में ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने के लिए गंभीर कोशिश की गई थी। अविभाजित बिहार और यहां निवास करने वाले आदिवासी-गैर आदिवासी भी आंदोलन से अछूते नहीं रहे।अविभाजित बिहार में शामिल छोटानागपुर और संथाल परगना के क्षेत्र ‘भारत छोड़ो आंदोलन‘ के प्रमुख केंद्र बन गए थे।

Quit India Movement and Jharkhand

  • अगस्त 1942 में कांग्रेस ने भारत छोड़ो आंदोलनका आह्वान किया। झारखण्ड पर इस आन्दोलन का व्यापक प्रभाव पड़ा तथा यहां के लोगों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
  • 8 अगस्त को भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित होने के तुरंत बाद कांग्रेस के अधिकतर नेता गिरफ्तार कर लिये गये।
  • 9 अगस्त को रांची में तथा 10 अगस्त को जमशेदपुर में हड़ताल हुई।
  • 9 अगस्त को हजारीबाग के दो प्रमुख नेताओं रामनारायण सिंह एवं सुखलाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया।
  • हजारीबाग में आंदोलन का श्रीगणेश 11 अगस्त को हुआ। श्रीमती सरस्वती देवी के नेतृत्व में एक जुलूस निकाला गया। इसी दिन सरस्वती देवी को गिरफ्तार कर लिया गया।
  • पलामू में आंदोलन की शुरुआत 11 अगस्त को नगर में जुलूस निकालने के साथ हुआ। जपला में मजदूर संघ के सचिव मिथिलेश कुमार सिन्हा की प्रेरणा से जपला फैक्ट्री के मजदूरों ने हडताल रखी।
  • देवघर में पंडित विनोदानंद झा के नेतृत्व में 11 अगस्त को एक जुलूस निकाली गयी। देवघर अनुमण्डल के सरवण में समानान्तर शासन स्थापित कर दिया गया।
  • 13 अगस्त को गोड्डा कचहरी पर राष्ट्रीय झंडा फहरा दिया गया।
  • 14 अगस्त को हजारीबाग के उपायुक्त कार्यालय पर से यूनियन जैक उतारकर राष्ट्रीय झंडा फहराया गया।
  • नदिया हाई स्कूल लोहरदगा के छात्रों द्वारा स्कूल भवन पर राष्ट्रीय झंडा फहराया गया।
  • संथाल परगना में अंग्रेजी हुकूमत के लिए सबसे बड़ा सरदर्द प्रफुलचन्द्र पटनायक थे। श्री पटनायक पहाडियां लोगों के बीच आंदोलन का निर्देशन कर रहे थे। डांगपारा उनके आंदोलन का मुख्यालय था।
  • ब्रिटिश हुकूमत द्वारा प्रफुलचन्द्र पटनायक और उनके तीन सर्वाधिक सक्रिय साथियों के लिए 200 रु. का इनाम घोषित किया गया था।
  • 30 सितम्बर को मानबाजार थाना पर आंदोलनकारियों ने आक्रमण किया। पुलिस द्वारा चलाई गयी गोली से चूनाराम महतो एवं गिरीशलाल महतो की मृत्यु हो गयी, जबकि गोविन्द महतो एवं हेम महतो घायल हो गये।
  • जमशेदपुर में रामानंद तिवारी के नेतृत्व में सिपाहियों ने विद्रोह किया, जिन्हें गिरफ्तार कर हजारीबाग जेल भेज दिया गया।
  • 9 नवम्बर, 1942 को हजारीबाग केन्द्रीय कारा से जयप्रकाश नारायण अपने पांच साथियों के साथ जेल की दीवार फांदकर रार हो गये। जयप्रकाश नारायण के साथ भागने वालों में रामानंद मिश्र, योगेन्द्र शुक्ल, सूरज नारायण सिंह, गुलाबी सोनार और शालिग्राम सिंह शामिल थे।
  • रांची में 22 अगस्त, 1943 को वाचस्पति त्रिपाठी की गिरफ्तारी संभवतः इस आंदोलन की सबसे अंतिम गिरफ्तारी थी।
  • इस तरह आजादी के पूर्व राष्ट्रीय आंदोलन में झारखण्ड क्षेत्र के वीर सेनानियों का अभूतपूर्व
  • योगदान रहा है। इनकी कुर्बानियों को देश सदैव याद रखेगा। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात झारखण्ड क्षेत्र से एकीकृत बिहार के मात्र दो सर्वश्री विनोदानंद झा तथा कृष्ण वल्लभ सहाय मुख्यमंत्री बने।

भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख नेतृत्वकर्ता

स्थाननेतृत्वकर्ता
रांचीनागेश्वर प्रसाद साव, पंडित रामरक्षा ब्रह्मचारी डॉ. जटु गोपाल मुखर्जी,
नारायण चन्द्र लाहरी, नन्द किशोर भगत, नारायणजी, देवकी नन्दन प्रसाद,
पूरन चन्द्र मित्रा, चमरा भगत, प्रतुल चन्द्र मित्रा, विमल दास गुप्त केशव दास गुप्त।
गुमलागंगा महाराज, गोविन्द भगत, देवेन्द्र कुमार, गणपत खंडेलवाल,
लड्डू महाराज, मथुरा प्रसाद।
हजारीबागरामनारायण सिंह, सुखलाल सिंह, सरस्वती देवी, कृष्ण बल्लम सहाय।
कोडरमाविशुन मोदी, दुखन मोदी, काली मोदी, बढन धोबी, बासन सोनार छडू राम, होरिल राम।
चतराराम अनुग्रह प्रसाद, नरसिंह भगत, भागू गंझू, उपेन्द्र प्रसाद 
गिरिडीहपुनीत राय, नरसिंह मारवाडी अनन्त लाल, मोतीराम लेखोराम, छठ्ठू ठठेरा, नारायण मोदी।
पलामूयदुवंश सहाय, भागीरथी सिंह खरवार वाचस्पति त्रिपाठी, मिथिलेश कुमार सिन्हा,
राजकिशोर सिंह, भुवनेश्वर चौबे, गौरीशंकर ओझा, राजेश्वरी सरोज दास,
रामेश्वर तिवारी, गणेश प्रसाद वर्मा, अमिय कुमार घोष नन्दलाल प्रसाद
गढ़वा गोपाल प्रसाद गौरीशंकर, विश्वनाथ प्रसाद, रामकिशोर तेली. साधो सिंह।
सिंहभूम :टी.पी. सिन्हा, एम. जान, त्रेतासिंह, एन.सी. मुखर्जी. पी.के. मेनन, वी.के. मेनन, मुन्नी घोष.
जी.जी. पेगी. वी.जी. गोपाल, टी.एम. शाह, एम. चक्रवर्ती।
संथाल परगनाप्रफुल्ल चंद्र पटनायक, कृष्ण प्रसाद, के. गोपालन, जाम्बवती देवी, प्रेमा देवी,
उषा रानी मुखर्जी, कमलाकान्त, मोतीलाल केजरीवाल, विनोदानन्द झा ।

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